मुद्दे की बात, कुमारेन्द्र के साथ

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सर्जिकल स्ट्राइक ने बढ़ाया देश का मनोबल

Posted On: 1 Oct, 2016 में

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आखिरकार भारतीय सेना द्वारा चिरप्रतीक्षित कदम उठाकर देश के दुश्मनों को खुली चुनौती दे दी है. पाक अधिकृत कश्मीर में दो से तीन किमी अन्दर तक घुसकर चालीस के आसपास आतंकियों को ढेर कर देने का, आतंकी प्रशिक्षण शिविरों को मटियामेट कर देने का जांबाजी भरा कार्य उरी आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तािन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के रूप में सामने आया है. भारतीय सेना ने पाक अधिकृत कश्मीतर में घुसकर सर्जिकल स्ट्रानइक किया है. इसके तुरन्त बाद मिलिट्री ऑपरेशन के महानिदेशक ले. रणबीर सिंह ने इसकी जानकारी दी. सर्जिकल स्ट्राइक के तुरन्त बाद मीडिया के माध्यम से जानकारी देना खुली चुनौती ही है. पाकिस्तान की छुटपुट आतंकी घटनाओं को सेना के साथ-साथ समूचा देश अत्यंत संयम से सहन कर रहा था किन्तु उरी की आतंकी घटना के बाद से समूचे देश में गुस्से का ज्वार फूट पड़ा था. लोगों में केंद्र सरकार के विरुद्ध भी अविश्वास जैसा माहौल बनता नजर आने लगा था. समूचे देश के नागरिक सेना के समर्थन में खड़े होकर पाकिस्तानी आतंकवाद का अंतिम और एकमात्र विकल्प युद्ध को ही मान रहे थे.

पाकिस्तान के विरुद्ध नफरत भरे माहौल में, दुर्दांत आतंकी घटना के बाद भी केंद्र सरकार ने संयम से काम लेते हुए कूटनीति भरे कदमों को उठाने की समझदारी दिखाई. ये बात सभी लोग समझते हैं कि ऐसे में जबकि पाकिस्तान जैसा आतंक-पसंद देश परमाणु अस्त्रों से सुसज्जित है, युद्ध किसी भी रूप में अंतिम और तर्कपूर्ण कदम नहीं होगा. ऐसे में बलूचिस्तान का मुद्दा उठाना, पाकिस्तान में होने वाले सार्क सम्मलेन में शामिल न होने का निर्णय, पाकिस्तान के साथ जल संधि पर पुनर्विचार किये जाने सम्बन्धी बैठक, पाकिस्तान को मोस्ट फेवरिट नेशन के दर्जा समाप्त करने सम्बन्धी विचार के बाद पाकिस्तान एकदम से बैकफुट पर दिखाई दिया. ऐसा इसलिए क्योंकि इन कदमों के बाद ही उसके राजदूत का बयान आया कि ‘जंग किसी मामले का हल नहीं. जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपने भविष्य का फैसला करने के लिए बेहतर मौका मिलना चाहिए. अगर उन्हें लगता है कि वे भारत के साथ ज्यादा खुश हैं तो वे वहीं रहें, पाकिस्तान को इस बात पर कोई आपत्ति नहीं है.’ भारत के सार्क सम्मलेन में शामिल न होने के निर्णय के बाद अन्य कई देशों द्वारा इंकार किया जाना भारत की कूटनीति की जीत ही है और आज इसी तरह के युद्ध की आवश्यकता है.

इस कूटनीतिक विजय के बीच भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक के द्वारा सम्पूर्ण देशवासियों को, शहीदों के परिजनों को ये सन्देश देने का काम किया है कि भारतीय सेना पडोसी देश की आतंकी घटनाओं को, हरकतों को सामान्य रूप से सहन करने वाली नहीं है. उसकी एक-एक हरकत का, एक-एक शहीद की शहादत का सटीक समय पर इसी तरह से बदला लिया जायेगा. सेना की ये कार्यवाही उन लोगों के लिए भी सन्देश है जो देश में रहकर भी देश-विरोधी ताकतों के हितार्थ बयान देते रहते हैं. यकीनन आज युद्ध अंतिम विकल्प नहीं है किन्तु भारतीय सेना ने आज जिस तरह से खुलेआम पाक समर्थित कश्मीर में कार्यवाही की है वह न सिर्फ आतंकियों के हौसलों को तोड़ेगी वरन झूठा अहंकार पाले पाकिस्तान को भी सबक सिखाएगी. उरी आतंकी घटना के बाद से, पाकिस्तान की तमाम नापाक हरकतों के बाद भी केंद्र सरकार के संयम दिखाने, सेना के धैर्य दिखाने पर देश का नायक, सेना के नायक बधाई के पात्र हैं. भविष्य की समस्त रणनीति, कूटनीति में उनकी विजय की शुभकामनाओं सहित जय हिन्द, जय हिन्द की सेना.

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Dr S Shankar Singh के द्वारा
04/10/2016

प्रिय श्री कुमारेन्द्र जी. सादर नमस्कार. मेरी समझ में सर्जिकल ऑपेरशन के दो फायदे हुए है. एक तो भारत के जो soft स्टेट ( गाँव भर की जोरू ) की जो छवि थी वह धुल गई है. पाकिस्तान को भी समझ आ जाएगी कि पाकिस्तान भारत के विरुद्ध जिस छद्म युद्ध का संचालन कर रहा है, उससे निपटने का समय आ गया है.

rameshagarwal के द्वारा
01/10/2016

जय श्री राम इस साहसपूर्ण परन्तु ज़रूरी कार्य के लिए जहाँ प्रधानमंत्री मोदी जी बधाई के पात्र है वही देशवाशियो को सेना पर गर्व है.अभी खतरा टला नहीं लेकिन यदि पकिस्तान ने गलती से हमला कर दिया तो हमारा नुक्सान तो होगा लेकिन पाकिस्तान ख़तम हो जाएगा क्योंकि  इस वक़्त पुरानी गलतियां नहीं दोहराई जायेंगी.ऍसेना पूरी तरह तैयार है युद्ध के अलावा और भी तरह से पकिस्तान को चोट पहुंचाई जायेगी..डॉ कुमारेंद्रू बहुत सार्थक लेख जिसके किये बधाई.

    आपका आभार, आज के माहौल में जबकि केंद्र विरोधी ताकतें बहुत तेजी से सिर उठा रही हैं, ऐसे कदम का उठाया जाना वाकई साहस का काम है.


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